यादव की गाथा Story of The Yadav
आर्यों की एक पराक्रमी शाखा - यादव ( महाराज यदु के वंशज) यादव वंश प्रमुख रूप से आभीर (वर्तमान अहीर ) प्राचीन , मध्यकालीन व आधुनिक भारत की कई जातियाँ तथा राज वंश स्वयं को यदु का वंशज बताते है और यादव नाम से जाने जाते है। क्रिस्टोफ़ जफ़्फ़ेर्लोट के अनुसार “ यादव शब्द कई उपजातियों को आच्छादित करता है जो मूल रूप से अनेक नामों से जानी जाती है , हिन्दी क्षेत्र , पंजाब व गुजरात में- अहीर , महाराष्ट्र , गोवा में - गवली , आंध्र व कर्नाटक में- गोल्ला , तमिलनाडु में - कोनर , केरल में - मनियार जिनका सामान्य पारंपरिक कार्य चरवाहे , गोपालक व दुग्ध-विक्रेता का था। ] ” लुकिया मिचेलुत्ती के विचार से - “ यादव लगातार अपने जातिस्वरूप आचरण व कौशल को उनके वंश से जोड़कर देखते आये हैं जिससे उनके वंश की विशिष्टता स्वतः ही व्यक्त होती है। उनके लिए जाति मात्र पदवी नहीं है बल्कि रक्त की गुणवत्ता है , और ये द्रष्टव्य नया नहीं है। अहीर (वर्तमान में यादव) जाति की वंशावली ...